ताप्ती प्रवाह क्षेत्र का सीमांकन कार्य हुआ प्रारंभ,

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मुलताई- जिला कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने अपने मुलताई दौरे के दौरान स्थानीय अधिकारियों को ताप्ती प्रवाह क्षेत्र के जलमार्गों का सीमांकन कर चिन्हित करने और अतिक्रमण मुक्त करने के आदेश दिए थे जिसके बाद आज राजस्व अमले ने ताप्ती प्रवाह क्षेत्र का सीमांकन प्रारंभ कर दिया है। राजस्व टीम में शामिल आर आई रवि पदाम,कमल परते,मुकेश भारत ने  जानकारी देते हुए बताया कि उनकी टीम सीमांकन कर निशान लगा रही है

इसके उपरांत रिपोर्ट एसडीएम एवं तहसीलदार को सौपी जाएगी आगामी करवाई के आदेश वरिष्ठ अधिकारी ही देंगे। उन्होंने कहा कि आज शेष बचे सीमांकन को सोमवार के दिन कार्य दिवस में पूर्ण किया जाएगा।  नगर वासी लंबे समय से ताप्ती एवं शनि सरोवर में मिलने वाले ताप्ती जल मार्ग एवं ताप्ती एवं शनि सरोवर से प्रवाहित होने वाले जलमार्ग का सीमांकन कर इन्हे अतिक्रमण मुक्त कराए जाने की मांग करते आ रहे थे। बताया जाता है कि अनेक स्थानों पर जहां पहले इन जलमार्गों की चौड़ाई 8 मीटर और 10 मी. हुआ करती थी आज उनकी चौड़ाई रिकॉर्ड निर्धारित चौड़ाई से बहुत कम है। और अनेक स्थान पर पक्का अतिक्रमण भी दिखाई देता है किंतु क्या यह प्रवाह क्षेत्र अतिक्रमण मुक्त हो सकेगा कहना कठिन है।

जिला कलेक्टर के निर्देश के बाद एसडीएम ने तहसीलदार अनामिका सिंह को ताप्ती प्रवाह क्षेत्र के जलमार्गों का सीमांकन करने के आदेश दिए थे जिसके बाद तहसीलदार अलमानिका सिंह द्वारा है पटवारियों का एक सीमांकन दाल बनाया गया जिसमें आरआई रवि पदाम, आर आई कमल परते, पटवारी मुकेश भारत, सोबत धुर्वे ,अशीष पवार एवं तीन नगर पालिका के कर्मचारी शामिल किए गए है।यह राजस्व दल मशीन के माध्यम से ताप्ती प्रभाव क्षेत्र के 10 खसरा क्रमांक 563, 539, 731, 762, 864 ,772 लगभग 4 से 5 किलोमीटर के एरिया में सीमांकन करेंगे। इसके अलावा ताप्ती सरोवर खसरा क्रमांक 580 रक्बा 3.517 हेक्टर जो कि लगभग 8 एकड़ होती है का भी सीमांकन करेंगे और इसके साथ ही शनि सरोवर खसरा क्रमांक 574 कुल भूमि 1.395 हेक्टर लगभग चार एकड़ क्षेत्र का भी सीमांकन करेंगे।

मुलताई – ताप्ती सरोवर से जुड़े ताप्ती जल मार्ग का सीमांकन नई बात नहीं है इससे पूर्व बीते 10 वर्षों में ताप्ती सरोवर से लेकर कैचमेंट एरिया स्टेशन तक आने वाले सभी जलमार्गों का अनेक बार सीमांकन हुआ  जलमार्गों पर स्थाई अतिक्रमण करना पाया गया। नोटिस दिए गए किंतु घटते जलमार्गों की सेहत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा और ना ही अतिक्रमण करने वालो  की सेहत पर। कुछ दिनों बाद में फिर सीमांकन हुए और यह सीमांकन का सिलसिला यूं ही चलता जा रहा है इसलिए नागरिकों को इन सीमांकनों से भी बहुत ज्यादा अपेक्षा नहीं है कि ताप्ती से जुड़े जलमार्ग एवं प्रवाह क्षेत्र के जलमार्ग अतिक्रमण मुक्त होकर मां ताप्ती का जल स्वच्छंद रूप से प्रवाहित हो सकेगा।सीमांकन अवसर पर अनेक धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों से जुड़े पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता भी शामिल रहे।

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