7 लाख 28 हजार खर्च होने के बाद भी अंधेरे में डूबा मुख्य मार्ग, विद्युत विभाग और नपा ने झोंका जिम्मेदारी का ठीकरा एक-दूसरे पर
मुलताई। मध्य प्रदेश विद्युत वितरण कंपनी द्वारा लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व विधायक निधि से नगर के मुख्य मार्ग ड्रीमलैंड सिटी से मुलताई की ओर स्ट्रीट लाइट लाइन स्थापित की गई थी। खंभे खड़े कर एलईडी लाइटें भी लगा दी गईं, लेकिन आज तक इन्हें बिजली कनेक्शन से नहीं जोड़ा गया। परिणामस्वरूप नगर के मध्य से गुजरने वाला यह प्रमुख मार्ग अब भी अंधेरे में डूबा है। 7 लाख 28 हजार रुपए की राशि खर्च होने के बावजूद लाइटें सिर्फ दिखावे के लिए खड़ी हैं। विद्युत विभाग का कहना है कि उनका कार्य पूरा हो चुका है, अब कनेक्शन देना नगर पालिका की जिम्मेदारी है। वहीं नगर पालिका अधिकारियों का कहना है कि जब नए खंभों की दूरी मुख्य लाइन से 500 मीटर से अधिक रखी गई है, तो अब अतिरिक्त खर्च वे क्यों करें।
नगर प्रवेश करते ही अंधेरा, उजाले के प्रयास रहे नाकाम
लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व नागरिकों और नगर पालिका ने स्थानीय विधायक चंद्रशेखर देशमुख से अनुरोध किया था कि नगर के प्रवेश मार्ग पर ड्रीमलैंड सिटी से मुलताई तक स्ट्रीट लाइट लगाई जाए ताकि रात में उजाला रहे। विधायक देशमुख ने एसएसटीडी योजना के तहत 7 लाख 28 हजार 202 रुपए की राशि स्वीकृत की और मध्य प्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी, मुलताई को कार्य की जिम्मेदारी सौंपी। विभाग ने बैतूल रोड पर ड्रीमलैंड सिटी से पुरानी दूध डेयरी तक लगभग 420 मीटर लंबी लाइन खड़ी की, जिसमें 9 खंभे और एलईडी लाइटें लगाई गईं। साथ ही 25 kVA क्षमता का ट्रांसफार्मर भी लगाया गया। लेकिन आज तक इन लाइटों को बिजली कनेक्शन से नहीं जोड़ा गया, जिससे पूरा क्षेत्र अंधकार में है।

विभागों की जिम्मेदारी का खेल
विद्युत वितरण कंपनी का कहना है कि उनका कार्य केवल खंभे, लाइट और ट्रांसफार्मर लगाना था, जिसे पूरा कर लिया गया है। अब स्ट्रीट लाइट को चालू करने की जिम्मेदारी नगर पालिका की है। दूसरी ओर नगर पालिका के इलेक्ट्रिकल इंजीनियर का कहना है कि जब एजेंसी विद्युत विभाग था, तो उसे कार्य पूर्ण कर लाइटें चालू अवस्था में नगर पालिका को सौंपनी चाहिए थी। विभाग ने 500 मीटर दूर लाइन लाकर छोड़ दी, अब नगर पालिका अतिरिक्त खर्च क्यों करे?

जनप्रतिनिधियों की अनदेखी
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि डेढ़ वर्ष बीत जाने के बाद भी न तो किसी जनप्रतिनिधि ने, न ही किसी सामाजिक संगठन ने यह जानने की कोशिश की कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद स्ट्रीट लाइटें अब तक क्यों नहीं जलीं। स्थानीय नागरिकों का कहना है— “यह मुलताई है, जहाँ ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ की कहावत सच होती दिख रही है।”
इनका कहना है
“हमारे विभाग को जितनी राशि मिली थी, उतना कार्य हमने पूर्ण कर दिया है। खंभे, केबल, एलईडी लाइट और ट्रांसफार्मर लगाए जा चुके हैं। अब नगर पालिका को नए कनेक्शन का आवेदन कर लाइन प्रारंभ करनी चाहिए।”
सुमित सोनी, सहायक अभियंता, मध्य प्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी, मुलताई
“इस कार्य की एजेंसी विद्युत विभाग थी। उन्हें स्ट्रीट लाइट चालू कर नगर पालिका को सौंपनी थी। उन्होंने मुख्य मार्ग की लाइट से 500 मीटर दूरी पर लाइन लाकर छोड़ दी है, ऐसे में नगर पालिका अब अतिरिक्त खर्च क्यों करे?”
योगेश अनेराव, इलेक्ट्रिकल उपयंत्री, नगर पालिका मुलताई

