लगभग 20 करोड खर्च के बाद भी अधर में लटकी हरदौली जल आवर्धन योजना नगर पालिका ने फिर बनाया लगभग 8 करोड का डीपीआर

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  • मुलताई -नगर की पेयजल समस्या के स्थाई समाधान के लिए 22 करोड़ की लागत से बनाई गई हरदौली जल आवर्धन योजना को लेकर जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी कितने गंभीर रहे हैं इसका उदाहरण 8 सालों से अधर में लटकी जल योजना है

जिसमें अधिकांश राशि का भुगतान ठेकेदार को आनन फानन कर दिया गया । पीएचई घटक के अधिकांश भुगतान तो बगैर भौतिक सत्यापन के भी कर दिए और योजना अब भी अधर में लटकी हुई है। अब योजनाओं को पूरा करने के लिए बांध एवं पीएचई घटक में लगभग 8 करोड़ से अधिक का डीपीआर बनाया गया है ताकि योजनाओं को पूरा किया जा सके । नगर पालिका के तकनीकी अधिकारी कहते हैं कि लगभग 22 करोड़ की लागत से बनाई गई योजना के डीपीआर में जो प्रावधान शामिल नहीं थे उसके लिए नई डीपीआर बनाई जा रही है। कितू बड़ा प्रश्न यह है कि योजना क्रियान्वयन काल में नगर पालिका में 4 तकनीकी अधिकारी एक सिंचाई विभाग से मॉनिटरिंग अधिकारी एसडीओ होने के बावजूद भी समय रहते अधिकारियों ने यह देखना आवश्यक नहीं समझा की प्रोजेक्ट में क्या कमियां है और डीपीआर बनाने वाली कंसल्टेंसी को भी लाखों का भुगतान कर दिया गया। यह तथ्य जितना चौंकाने वाला है उतना ही हास्य पद भी है।


बांध कटाव हुआ तो नपा ने जाना कि फाल निर्माण भी होता है


तकनीकी अधिकारी बताते हैं कि जब बांध का वेस्ट वियर( ओवर नदी) जमीनी सतह से ऊपरी भाग में हो और वेस्ट वियर जलमार्ग का स्टेटा हार्ड ना हो ऐसे स्थान पर वेस्ट वियर मे फाल बनाना आवश्यक होता है। यह दोनों कारण हरदौली बांध में मौजूद होने के बावजूद नगर पालिका को हरदौली बांध में फाल निर्माण किया जाना है इसकी जानकारी बाल बनने के 2 साल बाद तब लगी जब वेस्ट वेयर से कटाव प्रारंभ हो गया । अब नगर पालिका ने 2 करोड़ 69 लाख रुपए का फाल निर्माण प्रोजेक्ट बनाया है। उपयंत्री पंकज धुर्वे ने बताया कि पूर्व में हरदौली बांध घटक डीपीआर में फाल निर्माण का प्रावधान ही नहीं था।

पीएचई घटक में अमृत 2 योजना से फिर बना 5 करोड़ 5 लाख का स्टीमेट


नगर पालिका मे पूर्व ठेकेदार लोखंडे को ब्लैक लिस्टेड घोषित करने के बाद हरदौली के पीएचई घटक का 4 करोड़ 80 लाख रुपए का ठेका वर्तमान ठेकेदार को दिया गया था। पूर्व में नगर पालिका अधिकारी ने बताया था कि इस ठेकेदार को भी से 2 करोड़ 69 लाख से अधिक भुगतान किया जा चुका है किंतु उसके बावजूद भी ना तो फिल्टर प्लांट का कार्य पूर्ण हो सका ना संमल वेल का निर्माण हुआ ना इंटेक वेल का निर्माण किया गया। पूर्व की भांति नगरपालिका ठेकेदार को भी पाइपलाइन का भुगतान करती रही और वह भी बगैर टेस्ट किए अब नगर पालिका अमृत टू योजना में फिर से 13 किलोमीटर पाइप लाइन दो पानी की टंकी और नलों को पाइप लाइन से जोड़ने के लिए 5 करोड़ 97 लाख रुपए का एस्टीमेट बनाया है। यह एक योजना नहीं बीते 5 सालों में जितनी भी योजनाएं बनी है वह अभी तक पूरी नहीं हुई है और सभी में किसी न किसी माध्यम से फिर से री स्टीमेट बनाए जा रहे हैं जिसका अर्थ यह है कि पहले जितनी भी योजनाएं बनाई गई थी उसमें बहुत सारी गलतियां थी अगर ऐसा है तो यह गंभीर मामला है क्योंकि इससे शासन को करोड़ों का नुकसान हुआ है इस संपूर्ण मामले की जांच होनी चाहिए और जो राशि लग रही है उसकी वसूली उन्हीं लोगों से की जानी चाहिए
इनका कहना
हरदौली जल आवर्धन योजना के पीएचई घटक में अमृत टू योजना से 5 करोड़ 97 लाख एवं बांध घटक में 2करोड 69 लाख फाल निर्माण का स्टीमेट बनाया गया है जिसकी स्वीकृति शेष है।
पंकज धुर्वे उपयंत्री

नगर पालिका मुलताई

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