बिगड़े मौसम में भी ताप्ती परिक्रमा पदयात्रा निर्धारित समय पर पहुंच रही गांव-गांव

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मुलताई- बीते सोमवार को प्रारंभ हुई मां ताप्ती सम्पूर्ण परिक्रमा पदयात्रा अपने निर्धारित समय-सारणी के अनुरूप प्रतिदिन अपने गंतव्य स्थान पर पहुंच रही है। बीते पांच दिनों में सभी रात्रि विश्राम स्थानों पर सूर्यास्त के पूर्व ही पदयात्री सुरक्षित पहुंच रहे हैं।

यह जानकारी देते हुए दल प्रभारी संतोष आर्य ने बताया कि दो दिनों से मौसम बिगड़ जानें से बदली और बरसात का माहौल बना हुआ है। कही-कही बारिश भी हुई पर पदयात्रा निरंतर कदमताल बढ़ाते हुए आगे बढ़ रही है। जो धमन्या में शाम सवा पांच बजे शाम को पहुंच गई थी तो आज शुक्रवार को भी कुनखेडी में भी शाम पांच बजे ही पहुंच गई।

पदयात्री राजकुमार मालवीय पवन पाठेकर, दिनेश घोटे बबलू, श्रावण साहू ने बताया कि यात्रा जब सोनाझर से निकली तो बहुत मौसम बिगड़ गया था। रिमझिम बूंदा बांदी भी प्रारंभ हो गई थी। परन्तु जब पदयात्रा चलने लगी तो यात्रा के आगे-आगे बरसात हो रही थी और कूछ दूर जानें के बाद एक स्थान पर यात्री बारिश के चलते रुक गए तो बारिश भी रुक गई ओर जब पदयात्रा चलने लगी तो पीछे बरसात होने लगी जो वास्तव में किसी चमत्कार से कम नहीं था। यह देख जान पदयात्रियों का उत्साह कई गुना बढ़ गया और निर्धारित समय से पुर्व यात्रा अपने गंतव्य पर पहुंच गई। राजू पाटनकर ने बताया कि मौसम को देखते हुए पदयात्रियों के लिए बरसाती रेनकोट की व्यवस्था की गई जिसमे दीपकअहिरवार 18, सुरेश अग्रवाल 17 और राधेश्याम अग्रवाल ने 12  नग रेनकोट उपलब्ध कराए, ताकि पदयात्रा निर्बाध रूप से चलती रहे। पदयात्री मुन्ना यादव और बलीराम डोंगरे ने बताया कि मां ताप्ती का तट बहुत ही मनोरम और शांति प्रिय है। प्रतिदिन 25 से 30 किमी की पदयात्रा करने पर भी थकान महसूस नही हो रही है लगभग 75 वर्षीय सुमेरी यादव पैदल चलते हुए सबसे आगे नजर आते हैं तो 72 वर्षीय मानक पवार नंगे पांव पदयात्रा कर रहे हैं।

जगह-जगह हो रहा भाव विभोर स्वागत

मां ताप्ती की संपूर्ण परिक्रमा पदयात्रा में शामिल पदयात्रियों का रास्ते में आने वाले सभी ग्रामों में भाव विभोर स्वागत सत्कार हो रहा है। चाय नाश्ता, बिस्कुट,फल इत्यादि लेकर ग्रामीण पदयात्रियों की राह तकते नजर आते हैं। वहीं श्रद्धा से ध्वज पूजन यात्रीयो का तिलक, रंगोली और दीपक से आरती उतारकर स्वागत सत्कार किया जा रहा है। आज मोहटा में मनेगी दिवाली शनिवार सुबह कुन खेड़ी से निकलकर दोपहर खैरा भिलट के रास्ते लगभग 31 किमी चलकर पदयात्रा शाम 6 बजे मेलघाट आदिवासी अंचल महाराष्ट्र की सीमा पर बसे ग्राम मोहटा में पहुंचेंगी जन्हा परिक्रमा पदयात्रा का दीपोत्सव के साथ स्वागत किया जाएगा। नवल जैसवाल ने बताया कि पूरे गांव में श्रद्धालू अपने-अपने घरों के सामने रंगोली उकेरकर दीपक जलाते हैं और आरती उतारकर ध्वज और पदयात्रियो प्रत्येक घर के स्वागत किया जाता वही यथा संभव आतिशबाजी भी की जाती हैं।


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