जाने कौनसे कितने प्राचीन हैं हमारे दुर्गा मंडल,अपनों को अपनों से जोड़ते हैं दुर्गा मंडल

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मुलताई- पवित्र नगरी मुलताई में सार्वजनिक नवदुर्गा उत्सव मंडलो का अपना ऐतिहासिक महत्व रहा है। संपूर्ण मुलताई नगर में आधा दर्जन से भी अधिक ऐसे दुर्गा उत्सव मंडल है

जिनका इतिहास 50 वर्षों से अधिक का है। हालांकि इन मंडलों की आधारशिला रखने वाले आज संसार में नहीं है किंतु उनकी पीढ़ियां इन प्राचीन दुर्गा उत्सव मंडलो को नगर की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में सजोय हुए है। इन मंडलों से जुड़ी पवित्रता का अनुमान इस बात से भी लगाया जा सकता है कि मंडलों की आस्था से जुड़े लोग आज देश, प्रदेश एवं विदेशों में रहकर भी नवरात्रि पर्व पर इन मंडलों में अपनी भागीदारी निभाते हैं।आइए जानते हैं ऐसे ही प्राचीन मंडलों के बारे में

मां दुर्गा की आस्था से जुड़ा है थाना रोड तरुण मित्र मंडल- स्थापना वर्ष 1958

सार्वजनिक दुर्गा उत्सव मंडल तरुण मित्र मंडल थाना रोड यादव प्रेस इसकी स्थापना 1958 में की गई थी। यह नगर के चंद प्राचीन दुर्गा मंडलों में से एक है। मंडल से जुड़े बाबा राव देशमुख बताते हैं कि इस मंडल की स्थापना जिन लोगों ने की थी आज वह इस दुनिया में नहीं है। स्वर्गीय कुंदन लाल मालवीय, यादव राव जी देशमुख, सदाशिव गाडेकर, प्रेमचंद बाबूजी, राजेंद्र धोटे , दौलतराव चौहान अब इनके परिवार के लोग इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। यादव प्रेस दुर्गा उत्सव मंडल की विशेषता यह है कि यहां प्रतिवर्ष अलग-अलग स्वरूपों में मां जगत जननी दुर्गा की स्थापना होती है। यहां प्रतिवर्ष अमरावती से प्रतिमा बुलाई जाती है। जो कि बहुत ही आकर्षक होती है। इस वर्ष यहां मां दुर्गा तुलजा भवानी स्वरूप में विराजी है। सोलापुर जिले में स्थित तुलजापुर में विराजी मां तुलजा भवानी की प्रतिमा अत्यंत आकर्षक है।

आकर्षण का केंद्र होता है बंगाली कॉलोनी दुर्गा उत्सव मंडल- स्थापना वर्ष 1966

सार्वजनिक दुर्गा उत्सव मंडल बंगाली कॉलोनी मुलताई की स्थापना 1966 में अमूलचंद शाह द्वारा बस स्टैंड मुलताई पर की गई थी उसके बाद इसकी स्थापना बंगाली कॉलोनी में की जाने लगी। यहां मां दुर्गा गणेश कार्तिकेय के साथ बैठाई जाति है और माता का  स्वरूप बहुत ही आकर्षक होता है। जिसे बंगाल के कारीगरों द्वारा बनाया जाता है । विमल शाह बताते हैं कि पहले मुर्तीकार मुलताई आकर मुर्ती का निर्माण करते थे किंतु अब मूर्ति इंदौर से लाई जाती है। जहां बंगाली कारागिर इन प्रतिमाओं का निर्माण करते हैं। तुषार शाह बताते हैं कि दुर्गा उत्सव मंडल में बंगाली पंडित प्रतिदिन चार बार माता की पूजा अर्चना करते हैं।

55 वर्षों से संचालित है सार्वजनिक दुर्गा उत्सव मंडल नेहरू वार्ड

सार्वजनिक दुर्गा उत्सव मंडल नगर के प्राचीन उत्सव मंडलों में से एक है इस मंडल से जुड़े भक्त अनेक प्रदेश एवं विदेश में रहकर भी नवरात्रि पर्व पर इस मंडल से जुड़ते हैं। इसकी स्थापना नगर के प्रमुख समाजसेवी एवं डॉ अशोक भार्गव ,रमेश राऊत, बाल किशन चंदेल, रमेश जयसवाल, गणेश प्रजापति श्याम जयसवाल आदि ने की थी जिसमें से कुछ लोग अब इस दुनिया में नहीं रहे किंतु मंडल की गरिमा एवं पवित्रता को ध्यान में रखते हुए इस क्रम को आगे बढ़ाया जा रहा है प्रकाश गिरहारे बताते हैं कि ताप्ती महा आरती का आरंभ इसी मंडल से हुआ भंडारा प्रसादी एवं गरबे का प्रारंभ इसी मंडल से किया गया था। डॉ अंकुर भार्गव अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए प्रतिवर्ष यहां निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन करते हैं इस वर्ष भी यहां निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया जिसमें मरीजों  का निशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण, उपचार एवं दवाइयां वितरित की गई।

आकर्षक साज-सज्जा के लिए जानी जाती है बैतूल रोड दुर्गा मंडल

नव दुर्गा उत्सव मंडल बैतूल रोड वर्तमान समय में आकर्षक साज-सज्जा के लिए जाना जाता है । इस मंडल की स्थापना स्वर्गीय प्रीतम कौर, स्वर्गीय नरेंद्र पटेल, स्वर्गीय बबलू यादव द्वारा 3 3वर्ष पूर्व की गई थी। यहां नवरात्रि पर्व पर अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। गरबा, देवी जागरण, भजन संध्या आदि किंतु यहां की साज-सज्जा उल्लेखनीय होती है जो सभी को आकर्षित करती है।


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