गायत्री शक्तिपीठ जहां महिलाएं भी करती है तर्पण,प्रतिवर्ष गायत्री परिवार निशुल्क कराता है पितरो का तर्पण-पिंड दान

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मुलताई- ताप्ती तट पर स्थित गायत्री शक्तिपीठ मे प्रतिवर्ष पितृपक्ष प्रारंभ होते ही निशुल्क तर्पण पिंड दान आदि अनुष्ठान कराए जाते हैं और यहां विशेषता यह है कि महिलाएं भी तर्पण करती है। श्राद्ध पक्ष पूर्वजों के प्रति सम्मान और श्रद्धा भाव बनाए रखना तथा उनका पूजन करने का पर्व है।

गायत्री परिवार से जुड़े रामदास देशमुख बताते हैं कि पितृपक्ष के प्रथम दिन से गायत्री मंदिर में प्रतिदिन सुबह 8:00 बजे से 9:00 बजे तक तर्पण का कार्यक्रम करवाया जा रहा है।  जो 25 सितंबर पूर्णिमा तक प्रतिदिन करवाया जाएगा। अंतिम दिन तर्पण के साथ पिंड दान भी किया जाएगा। सभी लोग तर्पण कर्म करते हुए इस संसार के समस्त दिवंगतप्राणियों के के लिए मोक्ष प्राप्ति के लिए प्रार्थना की जाती है।

अपने कई जन्मों के पूर्वजों के लिए भी तर्पण कर्म किया जाता है। चराचर प्राणी जगत के दिवंगतो के लिए तर्पण कर्म किया जाता है कर्मकांड गायत्री मंदिर में निशुल्क करवाया जाता है। साथ ही तर्पण में लगने वाली सभी सामग्री भी निशुल्क ही उपलब्ध कराई जाती है। पर्यावरण को बचाने के लिए तर्पण करवाने वाले भाइयों और बहनों को उनके पूर्वजों स्मृति को बनाए रखने के लिए फलदार पौधे निशुल्क   वितरित किए जा रहे हैं । संपतराव धोटे ने बताया कि गायत्री परिवार धर्म और संस्कृति से जोड़ने के अलावा सामाजिक सरोकार रखते हुए पर्यावरण के लिए भी कार्य करता है और इसी निमित्त पौधे बांटे जा रहे हैं इस कार्य में किशन दरवाई एवं रामदास देशमुख रामराव साहू का सहयोग रहता है मंदिर में भाइयों के साथ बहने भी अपने पितरों का तर्पण करती हैं  अंतिम दिन तर्पण के साथ पिंड दान भी किया जायेगा गायत्री परिवार के परिव्राजक योगेश साहू एवं पुरुषोत्तम साहू यह कर्मकांड करवाते हैं गायत्री परिवार की बहने भी तर्पण कर्म पिंडदान कर्म घरों में जाकर भी  सम्पन्न करवाती है  गायत्री परिवार की ब्रह्मवादिनी बहने मीरा देशमुख धनवंती रविकर मोहनी सूर्यवंशी तर्पण कर्म एवम् पिंडदान करवाती है।


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