नगर का सबसे प्रथम एवं प्राचीन हनुमान मंदिर,जहां पूजन से प्रारंभ होते हैं शुभ कार्य


मुलताई- मां ताप्ती के आंचल की छांव में बसी मुलताई नगरी का अपना धार्मिक एवं पौराणिक महत्व रहा है और ताप्ती तट पर स्थित प्राचीन मठ मंदिर नगर के प्राचीन धार्मिक इतिहास के गवाह। यूं तो ताप्ती तट पर प्राचीन मंदिरों की लंबी श्रंखला है और सभी का अपना गौरवमई इतिहास भी 


किंतु ताप्ती तट पर स्थित बाल हनुमान मंदिर नगर का सबसे प्राचीन मंदिर होने के साथ ही प्रथम बजरंग मंदिर माना जाता है जिसका उल्लेख अंग्रेजों के काल में लिखे जाने वाले बैतूल जिले के गजेटियरट मे भी मिलता है जिसके आधार पर अनेक समाचार पत्रों ने इसे नगर का प्रथम बजरंग मंदिर कहां है इस मंदिर के संबंध में कहा जाता है कि यह नगर का सबसे प्राचीन हनुमान मंदिर है और सभी शुभ कार्य के लिए वर्षों से अग्रणीय पूजा इसी मंदिर में की जाती रही है। प्राचीन ताप्ती मंदिर एवं सूर्य कुंड से लगे हनुमान मंदिर को अत्यंत सिद्ध मंदिर भी माना जाता है। कहा जाता है कि यहां जो भी मनौती मानी जाए मांगी जाए फुल होती है यही कारण है कि कुछ भक्तों ने  सहयोग करके इस मंदिर को व्यवस्थित रूप दे दिया है हालांकि यह बदलाव मंदिर के प्राचीन स्वरूप में छेड़छाड़ किए बगैर की गए है ।

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इस मंदिर में अंजनी पुत्र हनुमान बाल रूप में विराजे हैं इस मंदिर की देखरेख गोस्वामी परिवार करता है जो कई पीढ़ियों से प्राचीन ताप्ती मंदिर एवं हनुमान मंदिर की देखरेख पूजन पाठ करता रहा है बसंत पुरी बताते हैं कि तीज त्यौहार एवं विवाह के अवसर पर इस मंदिर कि अपनी मान्यताएं हैं जो इसे नगर का अत्यंत प्राचीन मंदिर होना प्रमाणित करता है। पोले के अवसर पर बैल पोला पूजन में पहुंचने से पहले इस हनुमान मंदिर में आकर पूजन करते हैं इसके उपरांत ही हाई स्कूल ग्राउंड पर होने वाली पूजा में भाग लेते हैं। विवाह में बारात जाने के पहले दूल्हा प्रथम पूजा इस हनुमान मंदिर में करता है।

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और इसके उपरांत ही विवाह के रीति रिवाज आगे बढ़ते हैं और यह परंपरा वर्षो से चली आ रही है दूल्हा अपने परिजनों के साथ सूर्य शिष्य बजरंगबली का आशीर्वाद लेने इस मंदिर में पहुंचता है।  यह परंपरा आज भी है जहां से अनेक धार्मिक रीति-रिवाजों का श्री गणेश  होता है बसंतपुर कहते हैं कि मेरे देखते हुए हम से पहले हमारे दादा जी राम पुरी गोस्वामी इस मंदिर की देखरेख करते थे उसके पहले की पीढ़ियों का हमको याद नहीं लेकिन हां यह मंदिर नगर का अत्यंत प्राचीन  मंदिर है। और हम कई पीढ़ियों से इस मंदिर की देखरेख करते आ रहे हैं।


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