73 स्थापना दिवस: राजाओं की धरती, रंगीला राजस्थान 

भोपाल -राजाओं की धरती राजस्थान में मनाया गया 73 स्थापना दिवस इस अवसर पर राजस्थान की राजधानी जयपुर सहित संपूर्ण प्रदेश में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया राजस्थान देश का महत्वपूर्ण प्रदेश हैराजस्थान क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा और जनसंख्या के मामले में सातवां सबसे बड़ा राज्य है। हर साल की तरह 30 मार्च को देश में राजस्थान की स्थापना को दर्शाने के लिए राजस्थान दिवस मनाया जाता है। इस बार भी राजस्थान 73वां स्थापना दिवस मना रहा है। राजस्‍थान का शाब्दिक अर्थ राजाओं का स्‍थान होता है। यानि कि राजाओं की भूमि। चूंकि देश आजाद होने से पहले यहां अनेक राजा-महाराजाओं ने राज किया था। इससे पहले राजस्‍थान को राजपूताना के नाम से जाना जाता था, और कुल 19 रियासतों को मिलाकर यह राज्‍य बना था । 30 मार्च, 1949 में जोधपुर, जयपुर, जैसलमेर और बीकानेर रियासतों का विलय होकर ‘वृहत्तर राजस्थान संघ’ बना। इस दिन को राजस्थान के लोगों की वीरता, दृढ़ इच्छाशक्ति और बलिदान को नमन किया जाता है। राजस्थान दिवस को ही राजस्‍थान स्‍थापना दिवस भी कहते हैं। बास्केटबाॅल को राज्य खेल का दर्जा 1948 में दिया गया। गौरतलब है कि राजस्थान की खासियत भी यही है, कि यहां पर हर थोड़ी दूरी पर भाषा का अंदाज बदल जाता है। इस भाषा में अधिक मात्रा में लोक गीत, संगीत, नृत्य, नाटक, कथा, कहानी आदि उपलब्ध है। हालांकि इस भाषा को संवैधानिक मान्यता प्राप्त नहीं है। इस कारण इसे स्कूलों में पढ़ाया भी नहीं जाता है। रंगीलो राजस्थान के कई तरह के लोक नृत्य, व्यंजन व अनेकों भाषाओं के मिश्रित समूह को राजस्थानी भाषा का नाम दिया गया है।

नृत्य में घूमर (केवल महिलाओं द्वारा किया जाने वाला नृत्य) इस राज्य नृत्यों का सिरमौर (मुकुट), राजस्थानी नृत्यों की आत्मा कहा जाता है।राज्य शास्त्रीय नृत्य – कत्थक : कत्थक उत्तरी भारत का प्रमुख नृत्य है। इनका मुख्य घराना भारत में लखनऊ है तथा राजस्थान में जयपुर है। कत्थक के जन्मदाता भानू जी महाराज को माना जाता है। वही बात करें तो राजस्थान की सीमा पांच भारतीय राज्यों से लगती है, उत्तर में पंजाब, उत्तर पूर्व में उत्तर प्रदेश और हरियाणा, दक्षिण-पश्चिम में गुजरात और दक्षिण-पूर्व में मध्य प्रदेश। यह उत्तर पश्चिम में पंजाब के पाकिस्तानी प्रांतों और पश्चिम में सिंध के साथ एक सीमा भी साझा करता है। अपने टेक्सटाइल और हैंडीक्राफ्ट के लिए मशहूर राजस्थान सिंधु घाटी सभ्यता के अवशेषों का घर है। जिसमें कालीबंगा और बालाथल के साथ-साथ दिलवाड़ा मंदिर भी है।


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