क्या स्लोगन और नारे महिला सशक्तिकरण का आधार हो सकते हैं.?

गजाला अंजुम

भोपाल – अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं के सम्मान के लिए वर्ष में आने वाला एक दिन क्या 1 दिन में महिलाएं सम्मानित हो सकती है यह विचारणीय प्रश्न है शासकीय नारों में महिला सशक्तिकरण महिलाओं को अनेक सपने दिखाता है किंतु क्या नारे महिलाओं के विकास का आधार हो सकते है।

पड़ेगी बेटियां तो बढ़ेगी बेटियां किंतु निजी हाथों में महंगी शिक्षा प्रणाली के चलते कैसे पड़ेगी बेटियां और कैसे बढ़ेगी बेटियां क्या एक गरीब और मध्यम परिवार का व्यक्ति चाह कर भी अपनी बेटियों को महंगी उच्च शिक्षा दिला सकता है.? जन्म से वृद्धावस्था तक महिलाओं के लिए कई कानून बने जो महिलाओं को संरक्षण प्रदान करते हैं किंतु जानकारी के अभाव में यह कितने कारगर है इसका निर्णय आप करें 8 मार्च महिला दिवस खास दिन है  हम महिलाओं से जुड़े कानून के संबंध में आपको जानकारी दे रहे हैं जो जीवन के हर मोड़ पर कहीं ना कही आपके काम आ सकते हैं। महिला अधिकारों पर भास्कर एक्सपर्ट्स ने दी कानूनी जानकारी- 

●बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के तहत लड़की की शादी 18 वर्ष से कम उम्र मे नहीं की जा सकती है। यह अपराध है ऐसे मामले में 2 साल की जेल हो सकती हैं। अगर अभिभावक अपनी नाबालिग बेटी की शादी उसकी इच्छा के खिलाफ कर देते हैं, तो यह विवाह मान्य नहीं होगा। नाबालिक लड़की को बालिक होने पर दोबारा विवाह करने का अधिकार है।

●कन्या भ्रूण हत्या निषेध अधिनियम 1994 में प्रसव से पहले लिंग की जांच के लिए, महिला को बाध्य करना अपराध है। ऐसा करने वाले को 5 साल जेल व एक लाख तक का जुर्माना हो सकता है।

●दहेज प्रतिषेध अधिनियम में दहेज लेने या देने पर 5 साल तक सजा हो सकती है। प्रताड़ना की शिकायत किसी भी थाने में की जा सकती है।

●घरेलू हिंसा अधिनियम में महिलाओं की इच्छा के खिलाफ उनके किसी भी संपत्ति का इस्तेमाल कोई नहीं कर सकता। महिला बिना वकील सीधे कोर्ट जा भी सकती है।

●इंटरनेट पर सुरक्षा पर सुरक्षा के लिए महिलाओं को आईटी एक्ट की धारा 66 ई के तहत या अधिकार दिए गए हैं। कि कोई भी व्यक्ति उनके अनुमति के बिना उनकी फोटो व अन्य सामग्री नहीं ले सकता और ना ही इसे अन्य जगह पर प्रकाशित कर सकता है। इस तरह का अपराध करने पर 3 साल कैद की सजा का प्रस्ताव तय किया गया है। महिलाओं की आपत्तिजनक तस्वीर व वीडियो को अपलोड करना उनकी मानहानि है।

●देश भर की हर लड़की को शिक्षा का मौलिक अधिकार है राइट टू एजुकेशन में हिस्सेदारी तय है। शिक्षा के अधिकार में जिन बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिया जाता है उनमें 50% बालिकाओं का होना अनिवार्य है। राइट टू एजुकेशन में 6 से 14 वर्ष की उम्र के बच्चों को मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा का अधिकार देता है।

●सभी हिंदू महिलाओं को अपने पिता की संपत्ति में हिस्सेदारी और पूर्ण नियंत्रण का अधिकार हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 2005 देता है। बेटियों को विवाह के बाद भी बेटों के बराबर संपत्ति का हक है। वहीं विभिन्न हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने फैसले से व्यवस्था दी है। कि सरकारी पद पर कार्यरत पिता की मृत्यु के बाद बेटी चाहे वह विवाहित हो या अविवाहित उसे अनुकंपा नौकरी का अधिकार है।

●मुस्लिम महिलाएं भी गुजारा भत्ता माग सकती है। जब तक वह दोबारा निकाह नहीं कर लेती। विधवा महिलाएं ससुर से गुजारा भत्ता पाने का अधिकार रखती है।

●इंटरनेट से महिलाओं को आपत्तिजनक मैसेज भेजना सोशल मीडिया पर पीछा करना साइबर स्टॉकिंग अपराध में आता है। महिला आईटी एक्ट की धारा 66ए मे शिकायत दर्ज करा सकते हैं। अपराधी को 3 साल की कड़ी सजा हो सकती है।

●महिलाओं को कानूनी अधिकार है कि अपने बच्चों के स्कूल एडमिशन पर वह पिता की जगह अपना नाम दर्ज करा सकते हैं।

●समान पारिश्रमिक अधिनियम 1976 के तहत महिलाओं को पुरुष के समान कार्य वेतन का अधिकार भी है। महिलाओं को सूर्योदय से पूर्व या सूर्योदय के बाद उसकी इच्छा के खिलाफ काम करने को बाध्य नहीं किया जा सकता। भले ही उन्हें इस काम का अतिरिक्त मेहनताना ही क्यों ना दिया जाए। अगर महिला को मजबूर किया जाता है। तो वह इस उत्पीड़न की शिकायत दर्ज करा भी सकती है।

●अपने तरीके से जीने के लिए कानून महिलाओं को कई हक देता है लिविंग में भी महिला घरेलू हिंसा अधिनियम में कार्रवाई कर सकती हैं। यह संपत्ति की हकदार होती है और गुजारा भत्ता मांग सकती है। उसकी संतान को भी सभी हक हासिल होते हैं।

●महिलाओं पर अश्लील कमेंट करना या परेशान करना अपमानजनक टिप्पणी करना या इशारा करना अपराध है। ऐसे मामले में आईपीसी की धारा 295 व 509 में कार्रवाई की जा सकती है। सरकार का कर्तव्य है कि वह महिलाओं के लिए निशुल्क वकील मुहैया कराए।

●महिला पति की मृत्यु या पति से विवाह पर भी ससुराल में रह सकती है। तलाक के बाद भी उसी घर में रह सकती है, अगर वह चाहे और उसके पास रहने का कोई अन्य स्थान नहीं है।

●प्रसूति लाभ अधिनियम 2017 के तहत कामकाजी महिलाओं को प्रसव के बाद 3 महीने का वैतनिक अवकाश का हक है। अविवाहित महिला बच्चा भी गोद ले सकती है। हिंदू एडॉप्शन एंड सेक्शेन एक्ट के तहत अविवाहित महिला को भी बच्चा गोद लेने का अधिकार है।

●बुजुर्ग महिलाओं का पति की संपत्ति में तो हक है ही संतान भी उनकी अनदेखी नहीं कर सकती। माता-पिता की देखरेख के लिए मेंटेनेंस एंड वेलफेयर आफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटीजन एक्ट 2017 लागू है। साधन विहीन माता पिता अपनी संतान से सहयोग पाने के हकदार हैं।

●विधवा महिला अपने पति के हिस्से की संपत्ति के हकदार हैं। अगर वह दोबारा विवाह कर ले तो भी उसका यह अधिकार बरकरार रहेगा।


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