बैतूल- कोराना काल में स्वास्थ्य संस्थाओं और चिकित्सकों की अनेक बेरहम तस्वीरें  भी सामने आई किंतु  जिला शासकीय स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ डॉ रजनीश शर्मा सेवा भाव का एक ऐसा उदाहरण है जो, डॉक्टरी जैसे गरिमामय  पेशे को ऊंचाइया प्रदान करता है। हाल ही में डॉ रजनीश शर्मा को बड़ी जिम्मेदारी देते बैतूल सीएमएचओ डॉ. तिवारी ने उन्हें शहर के 3 कोविड केयर सेंटरों हमलापुर, विजय कोविड केयर सेंटर और आयुष चिकित्सालय टिकारी का नोडल अधिकारी नियुक्त किया है।

  जिले में कोरोना की स्थिति  सुधार के लिए सीएमएचओ द्वारा उठाए जा रहे कदम अत्यंत महत्वपूर्ण माने जा रहे  हैं। डॉ. शर्मा को प्रतिदिन इन कोविड केयर सेंटरों का भ्रमण कर प्रतिदिन की रिपोर्ट व्यक्तिगत रूप से सीएमएचओ को अवगत कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। डॉ. शर्मा ने नोडल अधिकारी के रूप में अपना कार्य प्रारंभ भी कर दिया है। महामारी के इस दौर में  कोरोना के वह मरीज, जो प्राइवेट अस्पतालों की भारी-भरकम फीस देने की स्थिति में नहीं थे और शासकीय अस्पताल जिनका का सहारा था ,ऐसे लोगों के लिए बैतूल जिले में रजनीश शर्मा किसी वरदान से कम नहीं ,

उनके सेवा भाव और कार्यप्रणाली को देखते हुए जहां मध्य प्रदेश दूरदर्शन ने भी उन पर विशेष कार्यक्रम दिल से बनाया है, वही अनेक समाचार पत्रों में भी प्राथमिकता से समाचार प्रकाशित किए हैं। हम इंडिया न्यूज़ , अपने विशेष के माध्यम से लोगों से रजनी शर्मा की कार्यप्रणाली के संबंध में जानने का प्रयास किया ताकि औरो के लिए प्रेरणा बन सके ।

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हर घंटे में मरीजों का हाल जानते है डॉ शर्मा

हमलापुर कोरोना सेंटर का अनुभव साझा करते हुए, मुलताई निवासी सुरेंद्र अरोरा बताते हैं कि, रजनीश शर्मा के रहते मुझे तो हमलापुर की सुविधाएं मेन हॉस्पिटल से भी अच्छी लगी, विशेष तौर से डॉक्टर रजनीश शर्मा, का इलाज और उनका व्यवहार, मुझे भगवान जैसे लगा, सामान्यतः डॉक्टर मरीजों से ठीक से बात नहीं करते, किंतु डॉ शर्मा  ने मुझसे मिलते ही कहा कि, चिंता मत करो 3 से 4 दिन में आपका मरीज आपके घर पहुंच जाएगा ,हमारे यहां कोई भी आए  हमको तो उन्हें ठीक करना है ।

अरोड़ा  बताते हैं कि डॉ शर्मा हर एक-दो घंटे में प्रत्येक मरीज से जाकर मिलते है, उन्हें देखते है, और उनसे हालचाल पूछा करते है कोई समस्या होने पर तत्काल समाधान करते , हमलापुर में मरीज को घर जैसा आभास होता था।

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 इलाज के साथ मिलता था आत्मविश्वास, अपनत्व भी 

हमलापुरा स्थित शासकीय कोरोना केयर सेंटर के प्रभारी रहते हुए डॉ रजनीश शर्मा ने मानवता की वह मिसाल कायम की है ,जो आज के दौर में दिखाई देना कठिन है। डॉ. शर्मा के समय इस केयर सेंटर में जब जब कोई कोरोना, पॉजिटिव मरीज पहुंचा, उसकी डॉक्टर को भगवान तुल्य मानने की धारणा मजबूत हुई है। हमलापुर कोरोना सेंटर पर मरीजों को निशुल्क इलाज के साथ संपूर्ण सुविधा एवं आत्मविश्वास, अपनत्व भी मिला, यही कारण है कि उस सेंटर से वापस आकर अपने अनुभव साझा करते हुए ,मरीजों के परिजनों की आंखें नम हो जाती है।

वह बताते हैं कि हम लोग निराश होकर सोमलपुर केयर सेंटर पहुंचे थे, हमें इस सेंटर पर जो इलाज मिला वह निजी अस्पतालों में लाखों रुपए खर्च करने के बाद में भी  नहीं मिलता और विशेष तौर से इस केयर सेंटर का जो माहौल था, डॉ रजनीश शर्मा का जो  अपनापन मिला, उसकी तुलना संभव ही नहीं।

हालांकि दूसरे बड़े सेंटरों की तरह यहां साधनों का अभाव था किंतु, रजनीश शर्मा ने अपनी कार्यप्रणाली से यह बताया कि, साधनों से अधिक, अच्छा मैनेजमेंट एवं चिकित्सक सहित स्टाफ में मरीज के प्रति सेवा का भाव अधिक मायने रखता है। 

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मुलताई नगर का दुर्भाग्य नहीं भाते अच्छे डॉक्टर

डॉ रजनीश शर्मा पूर्व में मुलताई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बीएमओ पद पर पदस्थ रहे वह ऐसे पहले डॉक्टर थे जिन्होंने 150 से अधिक गंभीर बीमारी के मरीजों को मुख्यमंत्री  सहायता राशि के प्रकरण बनाकर इलाज कराया और क्षेत्रवासियों को इसका लाभ दिलाया। किंतु विभाग से जुड़े सूत्र बताते हैं क्षेत्र की राजनीति का स्वरूप ऐसा रहा है कि
यहां हमेशा अच्छे डॉक्टरों की स्वीकार्यता कम रही है,जिसका मुख्य कारण स्वास्थ्य विभाग का वह तिलस्म है जिस में बदलाव के प्रयास बहुत से लोगों को नहीं भाते, क्योंकि दवाई, रिफर,  एंबुलेंस व्यवसाय, शहरों  के  हॉस्पिटलों में  कमीशन का खेल , पदस्थापना कहीं और  काम कहीं और, स्वास्थ्य केंद्र के बजाय डॉक्टर के घर पर लगने वाली  भीड़। इन परंपराओं को तोड़ना  आसान नहीं होता, डॉक्टर शर्मा मुलताई पदस्थ रहते हुए इन्हीं परंपराओं को तोड़ने का प्रयास कर रहे थे और राजनीति का शिकार हो गए। डॉ शर्मा तो जिले में और व्यापक कार्य कर रहे हैं किंतु मुलताई क्षेत्र अच्छे डॉक्टर के अभाव में सफर कर रहा है।

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