ताप्ती ,शनि, सूर्य नारायण सरोवर को लेकर गंभीर नहीं प्रशासन, बिगड़ रही है सरोवरो की स्थिति

मुलताई-  प्रदेश सरकार  परंपरागत जल स्रोतों के संरक्षण के लिए  गंभीर है किंतु स्थानीय नगर प्रशासन के लिए परंपरागत जल स्रोत, कभी प्राथमिकता नहीं रहे । नतीजा यह कि ,नगर के जल स्रोतों का आधार ताप्ती सरोवर और शनि सरोवर धीरे धीरे क्षतिग्रस्त होते जा रहे हैं। शनि सरोवर के घाट जगह-जगह से टूट कर बिखर गए हैं। ताप्ती सरोवर स्थिति भी ठीक नहीं है।

गजानन मंदिर के समक्ष वाले भाग की दीवार बाहर आ गई है। देख कर लगता है ,कभी भी सरोवर में समा जाएगी। कर्बला घाट का अधूरा कार्य ,कई वर्षों से पूर्ण नहीं हुआ। वह अब भी अधूरा है। ताप्ती सरोवर का 12 क्वार्टर का पिछला भाग भी क्षतिग्रस्त है। ताप्ती सरोवर का शुलूस गेट ,बीते 7 वर्षों से खराब है नगर पालिका अनेकों बार परिषद प्रस्ताव ले चुकी है किंतु  शुलूस  गेट का स्थाई समाधान नहीं हो सका, ताप्ती निकासी मार्ग से ताप्ती सरोवर का जल पूरे वर्ष भर व्यर्थ बहता रहता है, जिससे ताप्ती सरोवर का जल स्तर निरंतर घटता है। नगर की जनता बीते 10 सालों से ताप्ती जल निकासी मार्ग के नव निर्माण की मांग करते आ रही है ,किंतु कोई नतीजा नहीं निकला । नागरिकों का मानना है कि सरोवर की उपेक्षा का मुख्य कारण यह है कि, राजनीति करने वाले नेताओं और  नगर प्रशासन के लिए नगर की आस्था से जुड़े सरोवर प्राथमिकता कभी नहीं रहे । 

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ताप्ती सरोवर का वर्षों से आधा अधूरा बड़ा कर्बला घाट

जिन्हें करवाना चाहिए सुधार  ,वह करते हैं सफाई कार्य,

जनप्रतिनिधियों का आना जाना लगा रहता है  ,बीते 10 वर्षों में अनेक पार्टी के जनप्रतिनिधि ,समय-समय पर ताप्ती सरोवर पर, जनभागीदारी कर, स्वच्छता अभियान चलाते रहे है। इसका मकसद होता है लोगों में ताप्ती सरोवर और उससे जुड़े कुंडों के प्रति, जागृति पैदा करना, और  परंपरागत जल स्रोतों के प्रति जवाबदेही का भाव पैदा करना है।यह सराहनीय प्रयास है किंतु इसके साथ ही ताप्ती कुंडो और  सरोवरो के जीर्णोद्धार और सुधार कार्य के प्रति भी गंभीर प्रयास किए जाते तो, शायद ताप्ती सरोवर और शनि सरोवर और कुंडों की स्थिति वह नहीं होती जो है।

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सूर्य नारायण सरोवर जलभराव के इंतजार मे

सूर्य नारायण सरोवर में राशि और जल जाता कहां है।

नेहरू वार्ड में सूर्य नारायण सरोवर का निर्माण, ताप्ती की मुरम से लगभग 20 वर्ष पूर्व किया गया था, अपने निर्माण कार्य से अब तक अनेकों बार लाखों रुपए सुधार कार्य में के नाम पर खर्च किए गए, हर बार निर्माण कार्य, प्रारंभ करने के बाद यह दावा किया गया कि, अब सूर्य नारायण सरोवर में जल संग्रहित हो सकेगा ,किंतु इन 20 वर्षों में इसमें लगाई गई राशि ,कहां गई ना तो इसका पता है ,और ना ही इसमें कभी जल संग्रह ही हो पाया है। वाहवाही खूब हुई परिणाम अब तक नहीं आया है।

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ताप्ती सरोवर  की दीवार धीरे-धीरे बाहर आ रही है, जो कभी भी सरोवर में समा सकती है

सरोवरो की अनदेखी और कचरा  प्रबंधन पर करोड़ों खर्च 

ताप्ती सरोवर, सूर्य नारायण सरोवर, शनि सरोवर स्थानीय राजनीति और स्थानीय नगर प्रशासन की अनदेखी का शिकार हो गए, और देखते देखते ही इन सरोवर की स्थिति निरंतर बिगड़ती जा रही है। जानकार बताते हैं कि नगर के  सरोवर  नगर प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए  किंतु  इसके बजाय नगर पालिका ने कचरा प्रबंधन के नाम पर नगर से बाहर, मासोद रोड पर करोड़ों रुपए खर्च कर दिए एक साथ खर्च नहीं किए जा सकते थे तो अलग-अलग पीस वर्क बनाकर खर्च कर दिए और यही स्थिति सांडीया ग्राम की भी है। जिस कचरा प्रबंधन के नाम पर इतनी भारी-भरकम राशि खर्च की गई है उस कचरा प्रबंधन का औचित्य आज खोजना कठिन हो रहा है।

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वर्षों से नव निर्माण की बाट जोह  रहा  जल निकासी मार्ग ,(शुलूस गेट)

इनका कहना

नगर पालिका और ट्रस्ट की सीमाओं को जानने के बाद , उपयंत्री को भेजकर शनि सरोवर का स्टीमेट बनाया जाएगा, ताकि समय सीमा में जीर्णोद्धार  किया जा सके

नितिन कुमार बिजवे
मुख्य नगरपालिका अधिकारी मुलताई

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