बेदर्दी से उजड़ रही है हरी-भरी मनमोहक वादियां ,कब समाप्त होगा फलदार पेड़ों के कटने का सिलसिला

मुलताई- सतपुड़ा की मनमोहक वादियों में उकंग पठार के ऊपरी छोर पर स्थित, मुलताई क्षेत्र को प्राकृतिक सौंदर्य की प्रतिमा कहा जाता था।  समुद्री सतह से करीब 2526 फीट ऊंचाई ,ने इसे जहां मनमोहक रूप प्रदान किया था, वही क्षेत्र के चारों ओर घने जंगल क्षेत्र की पहचान हुआ करते थे। किंतु वन माफिया के चलते आज अधिकांश जंगल समाप्त हो गए हैं । और आज हरे भरे वृक्षों को  खोजना कठिन हो रहा है।

जंगलों के साथ ही संपूर्ण क्षेत्र में बड़ी मात्रा में फलदार वृक्ष पाए जाते थे, जो पल्ले बाटम की भेंट चढ़ कर रह गए, मुलताई क्षेत्र के फलदार वृक्ष ,कृषि भूमि और राजस्व नदी नालों पर लगे वृक्षों का जिस रफ्तार से क्षेत्र में सफाया हुआ है वह गंभीर संकट का विषय है। 

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फाइल फोटो ग्राम सांडिया में गत दिनों काटे गए वृक्ष

विभागीय  प्रक्रिया के बीच दम तोड़ते हरे भरे वृक्ष

बीते कुछ वर्षों में राजस्व क्षेत्र के फलदार वृक्षों के सफाए की रफ्तार अचानक बढ़ गई है। आलम यह है कि  दूसरे जिले के लोग आकर  यहां पर बड़े स्तर पर  व्यापार कर रहे हैं ।सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि इन फलदार वृक्ष के कटाई को लेकर चाहे वो खेत में पड़े हो, चाहे वह मशीन पर  हो इसकी शिकायत करने पर भी कोई कार्यवाही नहीं होती पिछले दिनों ग्राम सांडिया के बड़े भाग में नदी नालों के  राजस्व भूमि के सैकड़ों पेड़  काट दिए गए , जिसके समाचार भी प्रकाशित हुए अधिकारियों से शिकायत भी हुई, किंतु कोई नतीजा नहीं निकला,

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मशीनों पर कटने का इंतजार कर रहे  वृक्ष

राजस्व अधिकारी कहते हैं वन विभाग इसके लिए जवाब देह हैं ।और वन विभाग के अधिकारी कहते हैं राजस्व मामला है इसमें हम कोई कार्रवाई नहीं कर सकते। वन विभाग के अधिकारी कहते हैं हम परिवहन होते हुए पकड़ने पर ही कार्रवाई कर सकते हैं।

और जानकार बताते हैं कि जो आरा मशीन पर हरा फलदार वृक्ष आ रहे हैं, इसे काटने की स्वीकृति कोई भी नहीं दे सकता। झाड़ सुखने या खराब होने की स्थिति में राजस्व की प्रक्रिया के तहत इसकी स्वीकृति होती है। तो प्रश्न यह है कि जो नगर की मशीनों पर गीले बड़े-बड़े पेड़ सरेआम आ रहे हैं। और कोरोना कॉल को अवसर  बनाने के प्रयास हो रहे हैं। उसको लेकर अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। लोग कहते हैं कि जिस प्रकार संपूर्ण नगर बंद होने के बाद में भी आरा मशीन में चल रही है यह क्या अधिकारियों की जानकारी के बगैर संभव है।

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मशीनों पर कटने का इंतजार कर रहे  वृक्ष

क्या पौधे लगा कर फोटो खींचाने वाले कर पाएंगे  वृक्षों की सुरक्षा

पिछले कुछ वर्षों से राजनीतिक क्षेत्र में भी वृक्षारोपण पौधे लगाकर फोटो खींचाना और अपने आप को पर्यावरण के प्रति गंभीर बताने को लेकर होड़ मची हुई है । अनेक नेता और अनेक सामाजिक संगठन अपने आप को पर्यावरण के प्रति गंभीर और सकारात्मक मानते हैं किंतु बड़ा प्रश्न यह है कि ,राजनीतिक वृक्षारोपण और सामाजिक संस्थाओं द्वारा किए जाने वाले वृक्षारोपण में से कितने पौधे अपने वृक्ष तक की यात्रा पूर्ण कर पाते हैं। इसका उदाहरण मुलताई नगर के हर प्रमुख मार्ग पर दिखाई देता है। किंतु जब वर्षों पुराने पेड़ों को बचाने का प्रश्न आता है। यह सभी लोग मोन दिखाई देते हैं।

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फाइल फोटो ग्राम सांडिया में गत दिनों काटे गए वृक्ष

मुलताई नगर में सरेआम हरे पेड़ काटे जा रहे हैं। आए दिन समाचार प्रकाशित होते हैं। सब लोग जानते हैं। सरेआम मशीनों पर देखे जा सकते हैं किंतु इसके बावजूद भी इन हरे-भरे वृक्षों को बचाने के प्रयास कभी नहीं हुए,  और ना ही किसी राजनीतिक व्यक्ति ने इसे मुद्दा ही  बनाया, इसके विपरीत जब कोई महिला अधिकारी इन पर कारवाई करने निकलती है तो, राजनीतिक हस्तक्षेप होने लगते हैं। नतीजा यह है कि कभी भोसले काल में ग्रीष्मकालीन राजधानी रहे इस हिल स्टेशन की औसतन वर्षा निरंतर घट रही है । तापमान निरंतर बढ़ रहा है। अगर समय रहते अब भी इसे नहीं रोका गया तो, इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

इनका कहना

लकड़ीया हमारे वन क्षेत्र की तो है नहीं, राजस्व क्षेत्र की लकड़ी कि ना तहसीलदार को पड़ी है, ना पटवारी को पड़ी है, तो हम इनकी लकड़ी कब तक बचाएंगे।

अमित साहु
वन परीक्षेत्र अधिकारी मुलताई


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