जिन्हें सब लगते थे अपने, हमेशा याद आएंगे हाजी इकबाल चौहान

इकबाल भाई को यादों की श्रद्धांजलि

मुलताई- नगर के वरिष्ठ कांग्रेसी पूर्व ब्लॉक युवक कांग्रेस अध्यक्ष, पूर्व  प्रदेश अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ पदाधिकारी, जिला 20 सूत्रीय समिति के सदस्य  एवं लंबे समय तक अंजुमन इस्लामिया कमेटी मुलताई के सचिव रहे, हाजी एकबाल चौहान का निधन हो गया । उनके निधन से संपूर्ण क्षेत्र में शोक का माहौल है। उनका देहांत हृदय गति रुकने से हुआ, वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। महाराष्ट्र अकोला में उनका उपचार चल रहा था। वह अपने पीछे 4 पुत्र और 3 पुत्री सहित भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं उनके बड़े पुत्र निहाल चौहान ,सरफराज चौहान, बिलाल चौहान और कमाल चौहान है। हाजी इकबाल चौहान का लंबा राजनीतिक, सामाजिक, और व्यावहारिक जीवन रहा है। मुस्लिम समाज के अलावा भी उनका संपूर्ण क्षेत्र में व्यावहारिक मुकाम रहा है। युवाओं के लिए हमेशा प्रेरणा स्रोत रहे, इकबाल भाई आज ,नहीं है किंतु उनके किए गए कार्य, सदैव याद रहेंगे। सर्वमान्य मुस्लिम नेता होने के बावजूद वह कभी हिंदू मुस्लिम के दायरे में बंधकर कर नहीं रहे, यह उनकी  पहचान रही है।

This image has an empty alt attribute; its file name is tapti0570-501x1024.jpg

सामाजिक कार्यों में अग्रणी रहते थे इकबालं भाई

इकबाल भाई का लंबा  राजनीतिक सफर रहा है, इकबाल भाई की विशेषता यह थी कि उन्हें, सब अपने से लगते थे, यही कारण है की वह नगर एवं  समाज के अनेकों महत्वपूर्ण कार्यों के सहभागी बने, अनेकों महत्वपूर्ण कार्य को अंजाम दिया। सन 1984 में तत्कालीन विधायक अशोक कड़वे की मदद से, सर्वप्रथम उन्होंने पर्यावरण वाणिकी से मुलताई कब्रिस्तान की बाउंड्री वॉल स्वीकृत कराई थी। और इसके साथ ही कब्रिस्तान के जीर्णोद्धार की आधारशिला रखी गई।  अंजुमन इस्लामिया कमेटी के वह अब तक 20 वर्षों से भी अधिक समय तक निर्विरोध सचिव रहे हैं वर्षों तक सचिव रहने के दौरान उन्होंने अनेक सामाजिक कार्यों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

This image has an empty alt attribute; its file name is tapti0566.jpg

हाजी इकबाल चौहान का राजनीतिक सफर 

हाजी इकबाल चौहान ने अपने राजनीतिक जीवन का आरंभ 70 के दशक में तत्कालीन मुलताई विधानसभा के विधायक राधा कृष्ण गर्ग के विश्वासपात्र की तरह किया था ।वह राधा कृष्ण गर्ग  के परिवार के पारिवारिक सदस्य की तरह लंबे समय तक जुड़े रहे। हाजी शमीम खान बताते हैं कि, हम दोनों को उंगली पकड़कर राजनीति में लाने का श्रेय राधा कृष्ण गर्ग को ही जाता है। उनके जाने से कांग्रेस को भी बड़ी क्षति हुई है। कांग्रेस के अनेक महत्वपूर्ण पदों पर रहे, 80 के दशक में उन्हें मुलताई ब्लॉक युवक कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया । इसी समय मैं ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष हुआ करता था। हमने राजनीति की शुरुआत एक साथ की थी किंतु इकबाल भाई जैसी शख्सियत की कमी हमेशा नगर के लिए बनी रहेगी ।वह लोगों की मदद करने के लिए हमेशा आगे रहते थे ,और मदद करने में वह कभी जाति धर्म गरीब या अमीर का भेदभाव नहीं करते। वह  कांग्रेस प्रदेश स्तरीय अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के पदाधिकारी रहें, जिला 20 सूत्री समिति के सदस्य रहे। राजनीति में उन्हें स्पष्ट कहने के लिए जाना जाता था ,और यही कारण है कि वह पूर्व सांसद एवं केंद्रीय मंत्री रहे असलम शेर खान के विश्वासपात्र माने जाते थे।

This image has an empty alt attribute; its file name is tapti0568-689x1024.jpg

नगर में शोक का माहौल, क्या कहते हैं लोग

हाजी इकबाल चौहान के निधन से वह हर आंख नम हुई है, जो उन्हे जानते थे और उनके जानने वालों की संख्या बहुत ज्यादा है। सामाजिक स्तर पर एकबाल चौहान और समीम खान का अपना राजनीतिक और सामाजिक मुकाम रहा है। हाजी समीम खान कहते हैं इकबाल भाई की कमी को कभी पूरा नहीं किया जा सकेगा । राजनीति से हटकर उन्होंने हमेशा व्यक्तिगत संबंधों को महत्व दिया और एक दूसरे की बातों को स्वीकारने की उनकी क्षमता बहुत अधिक थी। कब्रिस्तान के समक्ष बना कम्युनिटी हॉल उन्हीं के प्रयासों की देन है। उनके नहीं रहने से आज मुझे अकेलापन महसूस हो रहा है। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मोहन सिंह परिहार कहते हैं इकबाल भाई दोस्तों के दोस्त थे, उनका इकबाल बुलंद रहा है ।हमारे संपूर्ण परिवार की ओर से उन्हें अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि। एसके पाठक अपने फेसबुक वॉल पर बहुत ही भावनात्मक श्रद्धांजलि देते हुए लिखते हैं , हिंदू-मुस्लिम कुछ नहीं होता यार,  इंसान हो जिसमें मानवता हो, वह अपना होता है । इकबाल चाचा अपनों से बढ़कर थे।

This image has an empty alt attribute; its file name is tapti0567.jpg

अपनों से अपनी बात

मैं राजनीति और पत्रकारिता क्षेत्र में हाजी इकबाल भाई और हाजी शमीम खान के पीछे पीछे चल कर यहां तक पहुंचा हूं । इन्होंने हमेशा कभी उंगली पकड़कर कभी डांट कर मुझे सामाजिक मूल्यों का  अहसास कराया है। पर्यावरण वानिकी के कार्यों के समय मैं यंग मुस्लिम एसोसिएशन  के माध्यम से मैं हाजी इकबाल भाई से जुड़ा था, कब्रिस्तान बाउंड्री वाल और धुआ रहित चूल्हे कार्यक्रम का हिस्सा बना। इसके उपरांत उन्हें ब्लॉक युवक कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने के बाद, उन्होंने मुझे कांग्रेस के साथ जुड़कर काम करने का अवसर दिया। आज जब वह हमारे बीच नहीं है मुझे एहसास होता है की हमारे लिए उनकी उपस्थिति कितनी महत्वपूर्ण थी।

असलम अहमद पत्रकार मुलताई

———————————————————————————————————-

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here