रिकॉर्ड वर्षा के बाद भी खाली दुनावा बांध,करोड़ों की लागत नतीजा शून्य

दुनावा से प्रकाश सूर्यवंशी

मुलताई – मुलताई क्षेत्र में इस वर्ष रिकॉर्ड  तोड़ वर्षा हुई है  क्षेत्र के समस्त बांध जल से लबालब भरे हुए हैं  किंतु  दुनावा  ग्राम में एक बांध ऐसा भी है जो अब भी जल अभाव के दौर से गुजर रहा है।

जो आज भी सन  2012-13 मे दुनावा में बने बांध को लगभग 8 वर्ष हो चुके हैं  लगभग 45 हेक्टेयर और 81 लाख की लागत से बने इस बॉध से किसान अपनी पूर्णतया सिंचाई नहीं कर पाते हैं, इसका एकमात्र कारण है बांध की दीवार से पानी का रिसाव होना बांध के गेट का वॉल भी टूटा हुआ है जिससे जैसे ही बारिश में बांध भरने की कगार पर आता है बांध की दीवार और गेट से पानी का रिसाव निरंतर चालू ही रहता है। जिससे किसान की जरूरत के मुताबिक पानी से पहले ही बांध का पानी समाप्त हो जाता है।

दुनावा के किसान बताते हैं कि इस बार किसान दुनावा बांध से  एक बार ही सिंचाई कर पाए हैं । दूसरी बार के लिए बांध में पानी ही शेष नहीं है ऐसे  में अनेक किसानों की फसलों के लिए संकट खड़ा हो सकता है ।


बांध का पानी नहर द्वारा नहीं छोड़ा जाता क्योंकि नहर द्वारा पानी छोड़ने के समय के पहले ही बांध का पानी द्वार तक नहीं रह पाता सिर्फ कुछ जगह गड्ढों में भरा रहता है। जिसमें किसान अपने मोटर पंप द्वारा सिंचाई करते हैं। इस बांध पर लगभग 20 किसान मोटर पंप द्वारा सिंचाई करते हैं जिन्हे भी पूरी तरह सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पाता ,अब इस स्थिति में भी शासन प्रशासन या विभाग द्वारा इस ओर ध्यान ना दे तो किसान अपनी समस्या लेकर कहां जाए किसे अपनी समस्या सुनाएं। 

फसल के लिए दूसरा पानी कहां से लाएं किसान 

किसान बताते हैं कि वर्तमान समय में क्षेत्र के सभी बांधों में  पानी लबालब भरा हुआ है लेकिन दुनावा के बांध में मात्र 10 या 20 प्रतिशत पानी बचा हुआ है ।अब इस बांध के भरोसे सिंचाई करने  वाले किसानों के सामने यह समस्या आ खड़ी हुई है कि रबी की फसल को पानी कहां से दे, वैसे ही खरीफ की फसल अत्यधिक बारिश की वजह से खराब हो चुकी थी ।

दुनावा के किसान मदन कौशिक ने बताया कि मेरी खरीफ की फसल सोयाबीन जो कि अत्यधिक बारिश की वजह से खेत में काट  रखने पर ही खराब हो चुकी थी अब मैंने 3 हेक्टेयर में गेहूं और चना की फसल बोया हूं जिसमें बांध से मोटर पंप द्वारा सिंचाई करता हूं, लेकिन अभी तक एक बार ही पूरी फसलों को पानी दे पाया हूं और बांध मे पानी लगभग समाप्त होने की कगार पर है।


ऐसे में अब गेहूं और चना की फसल को कहां से पानी दे पाउंगा। वही धीरज साहू, राजू शिवहरे, भद्दू कौशिक, गणेश कौशिक, मानाराम ब्वाड़े, राम प्रसाद साहू आदि किसानों ने भी लगभग इसी प्रकार की समस्या से अवगत कराया है।

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वरदान के जगह अभिशाप बन गया बांध

दुनावा वासी कहते हैं कि दुनावा बांध छतरी किसानों के लिए वरदान बनने की जगह अमिताभ बन गया है निर्माणाधीन काल में ही बांध निर्माण में हो रही अनियमितताओं को लेकर सवाल उठने लगे थे। ग्रामीण आए दिन घटिया निर्माण की शिकायत कर रहे थे । किंतु ना तो निर्माण समय पर पूर्ण हो पाया और ना ही गुणवत्ता में सुधार नतीजा यह हुआ कि इसका खामियाजा क्षेत्रवासी अब तक भुगत रहे हैं। सन 2018 में विभाग द्वारा बांध में सुधार कार्य हेतु लगभग 19 लाख रुपए स्वीकृत हो चुके थे सुधार कार्य का ठेका घाट पिपरिया  मे जिस ठेकेदार ने बांध बनाया था उसी ठेकेदार को दे चुके थे जो कि किसी कारणवश यह कार्य नहीं कर पाए उसके बाद या ठेका अवधेश तिवारी जिसने की दुनावा बांध का निर्माण किया था उसी को दिया गया लेकिन पिछले वर्ष कोविड-19 की वजह से यह  यह बांध का दुरुस्ती करण का काम शुरू नहीं हो पाया अब तो   बांध की दुरुस्ती का कार्य कर सकते हैं लेकिन अभी भी यदि बांध का सुधार कार्य नहीं किया तो किसान अपनी समस्या लेकर कहां जाए और अपनी समस्या किसे बताएं। पिछले 7-8 वर्षों से दुनावा बांध से सिंचाई करने वाले किसान अपनी फसल को एक या दो बार पानी देते आ रहे हैं यदि अभी भी बांध का सुधार कार्य नहीं कर पाए तो अगले वर्ष किसान अपने खेतों में रबी की फसल की बोनी नहीं करना चाहेंगे क्योंकि फसल को उचित सिंचाई नहीं दे पाने से किसान अपनी खेतों में लगी लागत भी नहीं निकाल पाएंगे।

इनका कहना

जल संसाधन विभाग मुलताई द्वारा दुनावा बांध सुधार कार्य की टेंडर प्रक्रिया पूर्ण हो गई है। 14 लाख रुपए की लागत से सुधार कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा।

सीएल मरकाम
एसडीओ जल संसाधन विभाग मुलताई

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