कोरोना के साथ जीना है तो आधुनिक शिक्षा जरूरी, कितनी कारगर डिजिटल शिक्षा,

डिजिटल शिक्षा, शिक्षक और विद्यार्थियों के अनुभव

हम इंडिया न्यूज विशेष

मुलताई-हमें कोरोना के साथ जीना है तो, परंपरागत शालाओं के स्थान पर आधुनिक तरीके अपनाने होंगे और इसके अभ्यस्त होना पड़ेगा। यह कहना है उत्कृष्ट विद्यालय के शिक्षक गिरीश साहू का वह, कहते हैं हमने डिजिटल शिक्षा अगस्त महा से प्रारंभ कि थी और आज 150 विद्यार्थी  डिजिटल शालाओं में भाग ले रहे हैं।  आइए जानते हैं डिजिटल शिक्षा, शिक्षक और विद्यार्थियों के अनुभव। जब तक  कोरोना  कोविड-19  की  दवाई आम नहीं हो जाती ,हमें कोरोना के साथ जीना और निरंतर संघर्ष करना होगा , किंतु  बड़ा प्रश्न यह है कि,  हमारे मौलिक जरूरतो को  कोरोना के साथ कैसे पूरा करें । जिसमें  शिक्षा  महत्वपूर्ण पहलू है।


कोरोना का सर्वाधिक प्रभाव विद्यार्थियों की शिक्षा पर पड़ा है। विद्यार्थियों की शैक्षणिक निरंतरता घटी है । किंतु इन सबके बीच एक अच्छी खबर यह है कि एक शिक्षक इस निरंतरता को बनाए रखने के लिए प्रयास कर रहे हैं,


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जिसका लाभ छात्रों को भी मिल रहा है। उत्कृष्ट विद्यालय के गणित विषय के शिक्षक गिरीश साहू छात्रों को लंबे समय से आधुनिक शिक्षा के माध्यम से अध्यापन करा रहे हैं, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं भी जुड़ रहे हैं। हमने ऑनलाइन माध्यम से दी जाने वाली शिक्षा प्रणाली के लाभ हानि और शंकाओं को लेकर शिक्षक गिरीश साहू और विद्यार्थियों से  चर्चा की तो पाया कि, धीरे-धीरे विद्यार्थी ऑनलाइन शिक्षा के अभ्यस्त हो रहे हैं। और अब वह ऑनलाइन शिक्षा प्राप्त कर किसी भी परीक्षा की चुनौती को स्वीकार करने के योग्य होने लगे हैं। ऑनलाइन शिक्षा विद्यार्थियों को जहां सुरक्षित शिक्षा प्रदान करती है, वही विद्यार्थियों को भविष्य की आधुनिक शिक्षा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भागीदारी भी निभा रही है।

150 विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं।

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उत्कृष्ट विद्यालय के शिक्षक गिरीश साहू बताते हैं कि ,शिक्षा एक निरंतर अभ्यास है। यह अभ्यास छूटने से विद्यार्थी के पीछे छूट जाने का भय बना रहता है। हमारे उत्कृष्ट विद्यालय से  प्रतिवर्ष  वार्षिक परीक्षा में  छात्र अच्छा प्रदर्शन करते हैं  और प्रवीण सूची में अपना स्थान पाते हैं, शिक्षक होने के नाते हमारी जवाबदेही बनती है कि हम अपनी शाख बनाए रखने के लिए प्रयत्नशील रहें, किंतु कोरोना के चलते विवशता थी जिसे देखते हुए हमने
वैश्विक महामारी में ऑनलाइन क्लास का सहारा लिया । हमने ऑनलाइन अभ्यास अगस्त माह से प्रारंभ किया प्रतिदिन कक्षा नवमी और दसवी के विद्यार्थियों को ऑनलाइन क्लास के माध्यम से गणित विषय के अध्यापन  कार्य प्रारंभ हुआ । आरंभिक चरण में, परंपरागत क्लास की तुलना में विद्यार्थियों को जोड़ने में कुछ समस्या आई किंतु धीरे-धीरे वह दूर होती गई और आज विद्यार्थी ऑनलाइन शिक्षा के अभ्यस्त हो गए हैं,और उनमें रूचि भी उत्पन्न हो गई है अब तक कक्षा दसवीं के 5 अध्याय एवं कक्षा नवमी में ब्रिज कोर्स सहित 2 अध्याय को पढ़ाया जा चुका है।प्रतिदिन ऑनलाइन क्लास में लगभग 150 विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं।

पहले नयापन लगता था अब अभ्यस्त हो गए 

नियमित अध्ययन करने वाली कक्षा दसवीं की छात्रा खुशी भराड़े, पलक आर्य, साक्षी ठाकुर बताती है कि पहले नयापन जरूर लगा किंतु अब ऑनलाइन शाला दिनचर्या में शामिल हो गई है 5 अध्याय पूर्ण हो गए हैं। डाउट होने पर ऑनलाइन ही समाधान मिल जाता है। ऑनलाइन शाला से जहां हमें नया अनुभव हुआ है वही हम लोग नियमित अध्ययन कर सकें है। 

विद्यार्थियों को मिल रहे हैं  प्रश्नों के उत्तर

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विद्यार्थी कुमारी नैनी,ताप्ती, भूमिका,छात्र वेदांत राघवेंद्र धीरज,ललित,यश आदि विद्यार्थियों ने बताया कि सर द्वारा हमे प्रतिदिन एक लिंक भेजी जाती है,इसे क्लिक करते ही आनलाइन क्लास में नियमित समय पर क्लास प्रारंभ हो जाती है। स्कूल के समान ही बोर्ड पर पढ़ाया जा रहा है, हम लोग भी घर में एक निश्चित स्थान पर बैठकर प्रतिदिन पढ़ाई कर रहे हैं। किसी भी प्रकार की गणित में समस्या आने पर हम माइक चालू करक आनलाइन कक्षा में ही प्रश्न पूछ कर अपनी समस्या का समाधान कर लेते हैं ,सवाल को उतारने के लिए भी हमें समय दिया जाता है और ऑनलाइन कक्षा के माध्यम से हमारा कोर्स भी पूर्ण हो रहा है।

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