एक ग्राम ऐसा भी, जहां ग्राम सहयोग से होते है करोड़ों के कार्य ,

धन, जमीन दान के साथ युवा करते हैं श्रमदान

सामान्यतः सार्वजनिक कार्यों के  लिए लोग शासन-प्रशासन की ओर देखते हैं। और वर्षों आवेदन और निवेदन में निकल जाते हैं । किंतु मुलताई विधानसभा क्षेत्र का एक ग्राम डहुआ ऐसा भी है जहां ग्रामीण अपने सामाजिक कार्यों का निर्वहन स्वयं ही करते हैं ग्राम के धार्मिक सामाजिक  कार्यों के लिए  ना सिर्फ सभी  धन दान करते हैं  बल्कि श्रमदान भी  किया जाता है 

साथी हाथ बढ़ाना, एक अकेला थक जाएगा, मिलकर बोझ उठाना

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प्राचीन रामलीला एवं ग्राम की सांस्कृतिक धरोहर को भविष्य के लिए सुरक्षित किया जा सके, इसके लिए एक रंगमंच बनाया जा रहा है, जिसमें दर्जनों युवा  धन  जमीन के साथ, अपना श्रमदान भी कर रहे हैं इन्हें देख कर नए दौर के उस गाने की याद आती है, साथी हाथ बढ़ाना साथ मेरे, एक अकेला थक जाएगा, मिलकर बोझ उठाना।, मिलकर हाथ बढ़ाना और ग्राम की परंपरा को कायम रखना इस ग्राम की सबसे बड़ी उपलब्धि कही जा सकती है।

87 वर्षों से सतत चल रही है संगीतमय में रामलीला

हाल ही में यहां के युवाओं ने ग्राम की सांस्कृतिक धरोहर और प्रसिद्ध रामलीला के लिए रंगमंच निर्माण का बीड़ा उठाया है ।रामलीला के सदस्य मनोज बारंगे बताते हैं कि ग्राम की रामलीला जो ग्राम में 87 वर्षों से सतत चल रही है यह संगीतमय रामलीला होती है जो कई वर्षों से ग्राम में प्रतिवर्ष आयोजित की जाती है और इसे देखने 20 से अधिक ग्राम के ग्रामीण डहुआ पहुंचते हैं । उचित स्थान का अभाव के चलते इसे व्यापक रूप दिया जाना संभव नहीं था इसलिए ग्रामीण और रामलीला मंच से जुड़े लोगों ने रंगमंच निर्माण की रूपरेखा बनाई,लगभग 1लाख रुपये की जमीन धुरेन्द्र बारंगे ने रंग महल के लिए दान दी जिसका  भूमिपूजन 5 अगस्त 2020 को अयोध्या राममंदिर के भूमिपूजन के साथ किया गया ।

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रंगमंच में श्रमदान की आहुति डाल रहे युवा

ग्रामीणों से जन सहयोग मांगा गया सभी ग्रामीणों में मिलकर लगभग तीन लाख की राशि जमा की है और अब रंगमंच का कार्य प्रारंभ हुआ है जिसमें सभी ग्राम के युवा इस रंगमंच में अपने श्रमदान की आहुति डाल रहे हैं हमने जब ग्रामीणों से बात की उन्होंने बताया कि, ऐसा नहीं है कि हम लोगों ने शासन प्रशासन से रंगमंच निर्माण की मांग नहीं की मांग की थी किंतु हमें यह मालूम था कि यह होगा नहीं, इसलिए हम लोगों ने अपनी व्यवस्था पहले से ही कर रखी थी, इससे पूर्व भी हम लोगों ने कामाख्या मंदिर निर्माण जन सहयोग सही किया था। इसलिए सभी के सहयोग से यह कार्य में बहुत बड़ा नहीं लगा ।आज संपूर्ण ग्राम के लोग एकजुट होकर एक भव्य रंगमंच निर्माण करने जा रहे हैं जो शीघ्र ही पूरा होगा। निर्माण उपरांत सभी दानदाताओं के शिलालेख लगाए जाएंगे ताकि जन सहयोग की यह परंपरा  आगे बढ़ सके।

रंगमंच  निर्माण में श्रमदान करने वालों में संतोष बुवाड़े ,अनिल बारंगे , धनलाल बिंझाड़े , मिथलेश साबले , प्रद्युम्न बारंगे , दीपक परिहार , जितेन्द्र मगर्दे , मंजू बुवाड़े , निहाल बारंगे , आदि ने श्रम दान कर लोगो को जागरूक कर रहे डहुआ के युवा

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