क्यों बंद हो गई गौमुख की जलधारा, सरोवर को क्यों कहा जाता है ताप्ती कुंड

ताप्ती सरोवर से गौमुख का क्या संबंध है। पूर्व में  गौमुख से ताप्ती  जलधारा 12 माह बहा करती थी। किंतु क्या कारण है कि अब गौमुख  बहना बंद हो गया । हमने यह जानने का प्रयास किया तो ,गौमुख से जुड़े अनेक ऐसे तथ्य सामने आए जिसे हम में से अधिकांश लोग नहीं जानते।

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जानकारों के अनुसार ताप्ती सरोवर निर्माण से पूर्व ताप्ती कुंडों से होकर बहती थी, सरोवर निर्माण के बाद  कुंड सरोवर में समा गए, जिसमें प्रमुख ताप्ती कुंड नए ताप्ती मंदिर के पीछे भाग में स्थित है। इसलिए ताप्ती सरोवर को ताप्ती कुंड कहा जाता है, ताप्ती कुंड से  अन्य कुंडों का  संपर्क जुड़ा रहे, इसलिए  सरोवर के निर्माताओं ने ताप्ती कुंड से पत्थरों का जलमार्ग बनाकर गौमुख से जोड़ा, इस जल मार्ग की सफाई हो सके, इसके लिए शिव मंदिर के समक्ष सफाई चेंबर बनाया गया था , जो जानकारी के अभाव में बंद हो गया। 
ताप्ती कुंड से जुड़ा होने के कारण गौमुख के जल को अत्यंत पवित्र जल माना जाता है, और इसे ताप्ती का उद्गम भी कहा जाता है ।

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मंदिर जीर्णोद्धार के समय दिखाई दिया था गौमुख जलमार्ग

हमने  गौमुख से ताप्ती  के संबंध मैं अधिक जानकारी के लिए नए ताप्ती मंदिर जीर्णोद्धार में शामिल रहे  पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष रवि यादव से से चर्चा की रवि यादव बताते हैं कि ताप्ती के मध्य स्थित नए ताप्ती मंदिर का जीर्णोद्धार हमारे साथियों ने मिलकर किया था, जिसमें स्वर्गीय रोन्याजी पंवार, पप्पू बोथरा, राजेश जायसवाल, नितिन जैन आदि शामिल थे, जब हम ताप्ती के निर्माण के लिए मंदिर के पिछले भाग में खुदाई कर रहे थे ,तभी वहां हमें ताप्ती कुंड दिखाई दिया, जिससे एक पत्थर से बना जलमार्ग दिखाई दिया जो ताप्ती कुंड को गौमुख से जोड़ता था, और जिसके सफाई के लिए मंदिर के समक्ष बने बजरंग मंदिर शिलालेख के पास, एक चेंबर बना था जो अब बंद हो गया है। 

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इसलिए कहा जाता है कि ताप्ती गौमुख से निकली है।

रवि यादव बताते हैं की ताप्ती सरोवर निर्माण से पूर्व ताप्ती कुंडो से होकर बहती थी ,सरोवर निर्माण में अनेक कुंड ताप्ती सरोवर में समा गए जिसमें से प्रमुख कुंड ताप्ती कुंड जो नए ताप्ती मंदिर के पिछले भाग में स्थित है। इसीलिए सरोवर को ताप्ती कुंड कहा जाता है और सरोवर निर्माण के समय ताप्ती कुंड से गौमुख को पत्थरों का जल मार्ग बनाकर जोड़ा गया था, इसीलिए कहा जाता है कि ताप्ती जी गौमुख से निकली है। गौमुख से निकलकर ताप्ती गुजरात के सूरत में समापन करती है।
इसीलिए गौमुख को कभी ताप्ती से अलग नहीं किया जा सकता स्थानीय प्रशासन की अनदेखी के चलते गौमुख बंद हो गया और नई पीढ़ी को गौमुख के महत्व के संबंध में जानकारी नहीं है ।

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अपनों से अपनी बात

आज हम निर्माण की तकनीक के आसमान को छूने का दम भरते हैं । किंतु हमारे प्राचीन निर्माणों की गुणवत्ता और महत्वपूर्ण तकनीकी विज्ञान को हम पीछे छोड़ते जा रहे हैं। हमारे प्राचीन निर्माणों को समझने का प्रयास करेंने पर हमें इसमें आधुनिक विज्ञान दिखाई देगा और जल संरक्षण, जल स्वच्छता की मूल भावना को भी हम समझ सकेंगे। हम इन संरचनाओं को नया आवरण देगे तभी हम इनके मूल भाव तक पहुंच पाएंगे। ताप्ती कुंड से गौमुख का रिश्ता और कुंडों से ताप्ती जल का सरोकार समय के साथ हमें इन्हें नए रूप देने की आवश्यकता है । ताकि परंपरागत संरचनाओं का संरक्षण हो सके।

असलम अहमद मुलताई

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